Spread the love डोकलाम गतिरोध के बाद चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश में स्थानों के नाम बदलने की प्रक्रिया उसके व्यापक भू-राजनीतिक और सांस्कृतिक विस्तार की रणनीति को दर्शाती है। हाल ही में चीन ने 23 स्थानों के नए नाम घोषित किए, जिसे भारत ने सख्ती से खारिज कर दिया है। चीन की नामकरण नीति और भारत की प्रतिक्रिया वर्ष 2017 के डोकलाम गतिरोध के बाद से अब तक चीन अरुणाचल प्रदेश के कुल 82 शहरों और भौगोलिक क्षेत्रों के नाम बदल चुका है। 10 अप्रैल 2026 को जारी 23 नए नाम इसी श्रृंखला का हिस्सा हैं। भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस तरह के कदम जमीनी हकीकत को नहीं बदलते। इसके बावजूद यह कदम चीन की दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि वह अरुणाचल प्रदेश को तथाकथित “दक्षिण तिब्बत” का हिस्सा बताता है। इसे भी पढ़े: प्रियंका गांधी का अमित शाह पर ‘चाणक्य’ तंज भू-राजनीतिक संकेत और आर्थिक संबंध चीन की यह नीति यह संकेत देती है कि वह भारत के साथ आर्थिक सहयोग की बात करते हुए भी अपनी क्षेत्रीय दावेदारी को प्राथमिकता देता है। वर्तमान में भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा 150 अरब डॉलर से अधिक है, जिसमें हांगकांग के साथ व्यापार भी शामिल है। नीतिगत बहस और विशेषज्ञों की राय भारत में कुछ पूर्व और वर्तमान नौकरशाह चीन के साथ आर्थिक संबंध मजबूत करने की वकालत करते हैं, लेकिन वे चीन के बार-बार के क्षेत्रीय दावों और सैन्य गतिविधियों पर स्पष्ट जवाब नहीं देते। इन विशेषज्ञों पर यह भी आरोप है कि वे चीन और रूस की कूटनीतिक और सैन्य गतिविधियों को नजरअंदाज करते हुए अमेरिका की नीतियों की अधिक आलोचना करते हैं। सीमा पर तनाव और सैन्य गतिविधियां पूर्वी लद्दाख में अभी तक कोई ठोस सैन्य तनाव कम नहीं हुआ है। वहीं, चुम्बी घाटी में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) सक्रिय है और सिलिगुड़ी कॉरिडोर के पास अमूचू नदी के आसपास विस्तार की कोशिश कर रही है। इसके अलावा, चीन पाकिस्तान को युआन श्रेणी की पनडुब्बियां, युद्धपोत और निगरानी जहाज उपलब्ध करा रहा है। साथ ही पाकिस्तान को 3000 किलोमीटर रेंज की सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल विकसित करने में भी मदद मिल रही है। दो मोर्चों की चुनौती और भारत की रणनीति वर्तमान स्थिति में पाकिस्तान के अमेरिका और चीन दोनों के साथ संबंध होने के कारण भारत को संभावित दो मोर्चों पर खतरे के लिए तैयार रहना होगा। चीन पूर्वी लद्दाख में 1959 की स्थिति और अरुणाचल प्रदेश पर अपने दावे से पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहा है। ऐसे में भारत के लिए बेहतर रणनीति मजबूत तैयारी और सटीक खुफिया जानकारी पर आधारित होनी चाहिए। साथ ही, भारत को यह स्पष्ट रुख बनाए रखना होगा कि स्थिर संबंधों के लिए सबसे पहले सीमाओं पर शांति और स्थिरता जरूरी है, न कि केवल व्यापारिक संबंधों का विस्तार। Source: https://www.hindustantimes.com/india-news/renaming-places-in-arunachal-is-part-of-chinas-cultural-expansion-101776411134596.html Post navigation महिला आरक्षण बिल पर लोकसभा में तीखी बहस, प्रियंका गांधी का अमित शाह पर ‘चाणक्य’ तंज