Counterfeit Keytruda vials seized in India during investigation into fake cancer drug racket
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भारत में एक बड़े स्तर पर चल रहे नकली कैंसर दवा रैकेट का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि महंगी जीवनरक्षक दवा ‘कीट्रूडा’ (Keytruda) के नाम पर मरीजों को कम कीमत का लालच देकर फर्जी दवाएं बेची गईं, जिससे उनकी जान पर गंभीर खतरा पैदा हो गया।

महंगी दवा बनी ठगी का जरिया

इस पूरे मामले के केंद्र में कीट्रूडा है, जो एक महंगी इम्यूनोथेरेपी दवा है और अमेरिकी कंपनी Merck & Co द्वारा बनाई जाती है। इसकी एक वायल की कीमत ₹1.5 लाख से अधिक हो सकती है।

कैंसर इलाज के भारी खर्च के कारण कई परिवार सस्ती दवा की तलाश में थे। ऐसे में उन्हें कम कीमत पर कीट्रूडा देने का झांसा दिया गया, लेकिन जांच में पता चला कि ये दवाएं असली नहीं थीं और इनमें अप्रभावी या असंबंधित पदार्थ मौजूद थे।

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पंजाब से शुरू हुई जांच

जांच की शुरुआत पंजाब के एक मामले से हुई। साल 2022 की शुरुआत में चंडीगढ़ के पास रहने वाली 56 वर्षीय महिला का लीवर कैंसर का इलाज PGIMER में चल रहा था, जहां उन्हें कीट्रूडा दी गई।

महंगी कीमत के कारण परिवार ने सितंबर से दिसंबर के बीच एक स्थानीय मेडिकल स्टोर से करीब ₹16 लाख में 12 वायल रियायती दर पर खरीदीं।

पुलिस जांच में सामने आई सच्चाई

शुरुआत में जो राहत लग रही थी, वह बाद में चिंता में बदल गई। दिल्ली पुलिस ने परिवार को जानकारी दी कि दवाएं नकली थीं और इनमें एंटीफंगल पदार्थ भरे हुए थे।

यह मामला अकेला नहीं था। International Consortium of Investigative Journalists (ICIJ) और द इंडियन एक्सप्रेस की संयुक्त जांच में ऐसे कई मामलों का खुलासा हुआ, जो भारत में नकली कीट्रूडा के बढ़ते काले बाजार की ओर इशारा करते हैं।

कई शहरों में फैला नेटवर्क

पुलिस रिकॉर्ड और अस्पताल डेटा के आधार पर जांच में पता चला कि दिल्ली और चंडीगढ़ जैसे शहरों में कई मरीजों को नकली दवा दी गई हो सकती है।

कुछ मामलों में मरीजों ने थोड़ी कम कीमत पर दवा खरीदी, लेकिन बाद में पुलिस जांच में वह फर्जी निकली।

असली जैसी पैकेजिंग, पहचान मुश्किल

फर्जी दवाओं की पैकेजिंग और लेबलिंग इतनी सटीक थी कि मरीजों और उनके परिवारों के लिए असली और नकली में फर्क करना लगभग असंभव था।

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कैसे काम करता था रैकेट

रिपोर्ट के अनुसार, यह रैकेट एक संगठित सप्लाई चेन के जरिए चलता था, जिसमें कुछ अस्पतालों के अंदरूनी लोग भी शामिल थे।

  • खाली कीट्रूडा वायल इकट्ठा की जाती थीं
  • उनमें एंटीफंगल जैसी अन्य दवाएं भर दी जाती थीं
  • फिर उन्हें दोबारा सील कर बाजार में बेचा जाता था

इन नकली वायल की कीमत करीब ₹90,000 प्रति 100 mg रखी जाती थी, जो बाजार कीमत से लगभग 40% कम थी।

गिरफ्तारी और जांच

इस मामले में अस्पताल स्टाफ और डिस्ट्रीब्यूटर्स समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जांच से संकेत मिलता है कि यह एक सुव्यवस्थित मल्टी-सिटी सिंडिकेट था।

अस्पताल सिस्टम में खामियां उजागर

जांच में यह भी सामने आया कि अस्पतालों में दवाओं के निपटान और ट्रैकिंग सिस्टम में खामियां थीं।

कुछ मामलों में खाली या आंशिक रूप से उपयोग की गई वायल का सही रिकॉर्ड नहीं रखा गया, जिससे उन्हें चोरी कर दोबारा इस्तेमाल किया जा सका।

सुरक्षा उपाय किए जा रहे मजबूत

इस खुलासे के बाद अस्पतालों ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करनी शुरू कर दी है। इसमें CCTV निगरानी, सख्त मॉनिटरिंग और दवा उपयोग व निपटान की बेहतर रिकॉर्डिंग शामिल है।

पुलिस का बयान

दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर Devesh Chandra Srivastva ने कहा कि यह मामला गंभीर है क्योंकि यह सीधे गंभीर मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा है।

उन्होंने कहा कि सस्ती दवा की तलाश में मरीज आसानी से ठगी का शिकार हो सकते हैं और ऐसे नेटवर्क पर नजर रखने के लिए जांच जारी है।

Source: https://www.cnbctv18.com/india/fake-cancer-drug-racket-exposed-after-patients-sold-counterfeit-keytruda-at-reduced-prices-report-ws-el-19885777.htm

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