पंच तत्वों में विलीन हुईं शीला दीक्षित, आखिरी विदाई देने उमड़ी भारी भीड़

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दिल्ली की पूर्व मुखयमंत्री शीला दीक्षित का शनिवार, 20 जुलाई को 81 साल की उम्र में निधन हो गया था। जिसके बाद राजधानी दिल्ली समेत पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। उनकी तबियत पिछले कुछ समय से खराब चल रही थी। नई दिल्ली के फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल में उनका इलाज भी चल रहा था। लेकिन शनिवार दोपहर को 3 बजकर 5 मिनट पर उनका दिल का दौरा पड़ा। जिसके बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। लेकिन 3 बजकर 55 मिनट पर शीला दीक्षित ने दम तोड़ दिया।

रविवार को पूरे राजकीय सम्मान शीला दीक्षित को अंतिम विदाई दी गई। उनकी अंतिम विदाई में भारी भीड़ एकत्रित हुई। सभी की आँखें नम थीं। निगमबोध घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। जहां यूपीए अध्यक्ष सोनियां गाँधी, पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी समेत कई नामी राजनेता मौजूद थे।

sheila dikshit death

शीला दीक्षित ने तीन बार (1998 से 2013 तक) बतौर सीएम दिल्ली की कमान संभाली। इस दौरान उन्होंने दिल्ली में फ्लाईओवर्स का जाल, अवैध कॉलोनियों में मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई। 2010 में कॉमनवेल्थ खेलों का आयोजन भी उनके ही कार्यकाल में हुआ था। उनके कार्यकाल में दिल्ली के इस विकास के लिए उन्हें दिल्ली को आधुनिक बनाने का श्रेय भी दिया जाता है।

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शीला दीक्षित को बचपन से राजनीति में कोई ख़ास दिलचस्पी नहीं थी। लेकिन दिल्ली युनिवर्सिटी के मिरांडा हाउस कॉलेज से आर्ट्स में मास्टर्स करने के बाद उनकी शादी आईएएस विनोद दीक्षित से हुई, जो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता उमाशंकर दीक्षित के बेटे थे। शीला दीक्षित ने पहली बार 1984 में यूपी के कन्नौज से लोकसभा चुनाव जीता। लेकिन फिर उन्हें लगातार हार का सामना करना पड़ा। 1998 में उन्होंने पूर्वी दिल्ली से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन भाजपा के लाल बिहारी तिवारी ने उन्हें हरा दिया। फिर 1998 में ही उन्हें विधानसभा चुनावों में जीत मिली और इसी साल वो पहली बार दिल्ली की मुख्यमंत्री भी बनी। लगातार तीन बार जीतने के बाद साल 2013 में उन्हें आप अध्यक्ष अरविन्द केजरीवाल ने नई दिल्ली से हरा दिया। 2014 में उन्हें केरल का राज्यपाल भी बनाया गया।