Spread the love अंटार्कटिक की यात्रा पर निकले एक क्रूज जहाज में हंटावायरस संक्रमण के मामलों ने वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, जहाज पर तीन यात्रियों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य संदिग्ध और पुष्टि किए गए मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य अधिकारी अब संक्रमण के स्रोत और इसके फैलाव की जांच कर रहे हैं। यह प्रकोप क्रूज जहाज MV Hondius से जुड़ा है, जो 1 अप्रैल को अर्जेंटीना से अंटार्कटिका के लिए रवाना हुआ था। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अन्य स्वास्थ्य एजेंसियां अब इस मामले की निगरानी कर रही हैं। इसे भी पढ़े: Kilmora(किलमोड़ा) Health Benefits: जानिए इस जंगली फल के जबरदस्त फायदे जहाज पर क्या हुआ? WHO के अनुसार, जहाज पर पहली मौत 11 अप्रैल को हुई, जब 70 वर्षीय एक डच नागरिक की मृत्यु हो गई। इसके बाद 26 अप्रैल को उनकी 69 वर्षीय पत्नी की भी मौत हो गई। वहीं, 2 मई को एक जर्मन महिला की मौत की पुष्टि हुई। बाद में स्वास्थ्य अधिकारियों ने पुष्टि की कि कम से कम दो यात्री एंडीज वायरस स्ट्रेन से संक्रमित थे। यह हंटावायरस का वही प्रकार है, जो मुख्य रूप से अर्जेंटीना और चिली में पाया जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह उन कुछ दुर्लभ स्ट्रेनों में शामिल है जिनमें सीमित स्तर पर इंसान से इंसान में संक्रमण फैलने की संभावना मानी जाती है। ब्रिटेन की हेल्थ सिक्योरिटी एजेंसी ने बताया कि कुछ यात्री यात्रा के दौरान पहले ही जहाज छोड़ चुके थे। हालांकि, उनमें उस समय तक कोई लक्षण नहीं दिखे थे। हंटावायरस क्या है? हंटावायरस एक दुर्लभ लेकिन गंभीर वायरस है, जो आमतौर पर संक्रमित चूहों या अन्य कृन्तकों (rodents) के मल, मूत्र या लार के संपर्क में आने से फैलता है। यह संक्रमण अक्सर दूषित कणों को सांस के जरिए शरीर में जाने पर होता है। हालांकि, कुछ मामलों में इंसान से इंसान में संक्रमण फैलने की संभावना भी बताई गई है, लेकिन यह बेहद दुर्लभ माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जहाज पर संक्रमण संक्रमित कृन्तकों के संपर्क या यात्रियों के बीच नजदीकी संपर्क के कारण फैला हो सकता है। हंटावायरस के लक्षण क्या हैं? एंडीज स्ट्रेन से संक्रमित व्यक्ति में Hantavirus Pulmonary Syndrome (HPS) नामक गंभीर बीमारी विकसित हो सकती है। इसकी शुरुआत सामान्य फ्लू जैसे लक्षणों से होती है। हंटावायरस के प्रमुख लक्षण तेज बुखार थकान मांसपेशियों में दर्द सिरदर्द चक्कर आना सांस लेने में कठिनाई गंभीर मामलों में फेफड़ों पर असर विशेषज्ञों के अनुसार, बीमारी बढ़ने पर मरीज को तत्काल मेडिकल सहायता की जरूरत पड़ सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस स्ट्रेन की मृत्यु दर 20% से 40% के बीच हो सकती है। यात्रियों को केबिन में किया गया अलग संक्रमण की पुष्टि के बाद जहाज पर मौजूद यात्रियों को उनके केबिन में सीमित कर दिया गया है। स्वास्थ्य अधिकारी आइसोलेशन, संपर्क ट्रेसिंग और निगरानी जैसे उपाय लागू कर रहे हैं। ये प्रक्रियाएं काफी हद तक कोविड-19 महामारी के दौरान अपनाए गए प्रोटोकॉल जैसी हैं। संक्रमण कहां से फैला, जांच जारी जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यात्रियों को संक्रमण आखिर कहां से हुआ। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, हंटावायरस का इनक्यूबेशन पीरियड यानी लक्षण विकसित होने में लगने वाला समय लगभग आठ सप्ताह तक हो सकता है। ऐसे में संक्रमण जहाज पर चढ़ने से पहले, अर्जेंटीना और चिली की यात्रा के दौरान या जहाज पर ही हुआ हो सकता है। अर्जेंटीना के अधिकारी संक्रमित यात्रियों की यात्रा गतिविधियों की जांच कर रहे हैं। जांच विशेष रूप से पटागोनिया और उशुआइया क्षेत्र पर केंद्रित है। उशुआइया को “द एंड ऑफ द वर्ल्ड” नाम से भी जाना जाता है, जहां से जहाज ने यात्रा शुरू की थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, जांचकर्ताओं को संदेह है कि डच दंपति संभवतः उशुआइया में बर्ड-वॉचिंग ट्रिप के दौरान संक्रमित हुए होंगे। जलवायु परिवर्तन से बढ़ा खतरा? अर्जेंटीना के संक्रामक रोग विशेषज्ञ ह्यूगो पिज्जी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण अर्जेंटीना का मौसम अधिक उष्णकटिबंधीय होता जा रहा है। इससे डेंगू और येलो फीवर जैसी बीमारियों के साथ-साथ चूहों की संख्या बढ़ाने वाले पौधों में भी वृद्धि हुई है। अर्जेंटीना के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, जून 2025 से अब तक देश में हंटावायरस संक्रमण के 101 मामले दर्ज किए गए हैं। यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुनी है। पहले यह संक्रमण मुख्य रूप से पटागोनिया क्षेत्र तक सीमित था। हालांकि, हालिया मामलों में 83% संक्रमण अर्जेंटीना के उत्तरी हिस्सों में दर्ज किए गए हैं। कब हुई हंटावायरस की पुष्टि? दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य अधिकारियों ने उस समय हंटावायरस की जांच शुरू की, जब आईसीयू में भर्ती एक ब्रिटिश यात्री की कई अन्य बीमारियों की रिपोर्ट निगेटिव आई। पहले यात्री की मौत के 21 दिन बाद, शनिवार को अधिकारियों ने हंटावायरस संक्रमण की पुष्टि की। इसके अगले दिन WHO ने जहाज से जुड़े संभावित प्रकोप की जांच शुरू करने की घोषणा की। उस समय तक जहाज केप वर्डे के पास पहुंच चुका था। इसके बाद डच महिला की भी जांच की गई, जिनकी जहाज छोड़ने के बाद मौत हो गई थी। उनकी रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई। बाद में स्विट्जरलैंड के अधिकारियों ने पुष्टि की कि सेंट हेलेना में जहाज से उतरे एक यात्री में भी हंटावायरस संक्रमण पाया गया है। FAQ: हंटावायरस से जुड़े सवाल 1. हंटावायरस कैसे फैलता है? यह मुख्य रूप से संक्रमित चूहों या कृन्तकों के मल, मूत्र और लार से फैलता है। दूषित कण सांस के जरिए शरीर में जा सकते हैं। 2. क्या हंटावायरस इंसान से इंसान में फैलता है? अधिकांश मामलों में नहीं। हालांकि, एंडीज स्ट्रेन में दुर्लभ परिस्थितियों में मानव-से-मानव संक्रमण की संभावना बताई गई है। 3. हंटावायरस कितना खतरनाक है? यह गंभीर फेफड़ों की बीमारी पैदा कर सकता है। कुछ मामलों में इसकी मृत्यु दर 20% से 40% तक बताई गई है। Source: https://www.hindustantimes.com/world-news/what-is-hantavirus-symptoms-cause-behind-spread-explained-as-outbreak-on-ship-sparks-concerns-101778128691663.html Post navigation IPL 2026 फाइनल बेंगलुरु से हटाकर अहमदाबाद शिफ्ट, कारण जानें गर्मियों में माइग्रेन से बचाव: सिरदर्द शुरू होने से पहले अपनाएं ये आसान तरीके