LPG Alternative DME
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भारत की LPG‑आधारित रसोई गैस पर निर्भरता के लिए एक नई देशी तकनीक आई है। पुणे स्थित CSIR‑NCL (CSIR‑National Chemical Laboratory) के वैज्ञानिकों ने Dimethyl Ether (DME) नामक एक साफ‑जलने वाली सिंथेटिक गैस बनाने की आत्मनिर्भर तकनीक विकसित की है, जिसे LPG के विकल्प या ब्लेंड के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे देश की ईंधन आयात पर निर्भरता कम करने और ऊर्जा‑सुरक्षा बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

DME: LPG जैसा लगने वाला देसी गैस

DME (डाइमिथाइल ईथर) एक ऐसा साफ बर्निंग गैसीय ईंधन है जो देखने और इस्तेमाल करने में LPG जैसा ही लगता है, लेकिन जलाने पर यह कम धुआँ, कम सोट, कम नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx), कम सल्फर ऑक्साइड (SOx) और कम धूल कण (particulate matter) देता है। इसलिए इसे “क्लीन फ्यूल” के रूप में देखा जा रहा है।

CSIR‑NCL की टीम ने पेटेंट‑प्रोटेक्टेड तकनीक के जरिए DME बनाने का तरीका तैयार किया है, जिससे उत्पादन लागत कम रखने की संभावना है। अगर भविष्य में इसे बड़े स्तर पर उपयोग जाता है तो LPG और अन्य ईंधन पर आयात के लिए खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा की बचत भी हो सकती है।

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BIS ने दिया LPG के साथ “DME मिलाने” का लाइसेंस

भारतीय ऊर्जा‑सुरक्षा कार्यों को देखते हुए Bureau of Indian Standards (BIS) ने IS 18698:2024 नामक स्टैंडर्ड जारी किया है, जिसके तहत LPG में अधिकतम 20% तक DME मिलाना घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक इस्तेमाल के लिए मान्य किया गया है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, 8% तक DME ब्लेंड रेट पर घरेलू इस्तेमाल में सिलिंडर, रेगुलेटर, होज़ और बर्नर में कोई बड़ा बदलाव नहीं चाहिए। इसका मतलब यह है कि अगर भविष्य में DME‑LPG ब्लेंड आ जाते हैं तो ज़्यादातर घरों को अभी‑के सिलिंडर‑सिस्टम को बदलने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी


ऊर्जा सुरक्षा और LPG आयात की चुनौती

भारत अपनी फॉसिल ऊर्जा की लगभग 80% से ऊपर मात्रा आयात के जरिए खरीदता है, जिसमें LPG खास महत्व रखती है। दुनिया भर में वैश्विक आपूर्ति‑समस्याओं ने पिछले कुछ सालों में LPG की कीमतों को ऊपर तक धकेला है, जिससे सब्सिडी वाले रसोई गैस‑सिलिंडर लेने वाले लाखों घरेलू उपभोक्ता प्रभावित हुए हैं, खासकर Pradhan Mantri Ujjwala Yojana योजना के तहत गैस उपयोग करने वाले घर।

CSIR‑NCL की यह तकनीक इसी बाधा को कम करने की दिशा में एक कदम मानी जा रही है:

  • अगर देशभर में LPG खपत का थोड़ा हिस्सा DME से ही पूरा हो सके, तो यह आयात‑निर्भरता और विदेशी मुद्रा‑खर्च दोनों पर दबाव कम कर सकता है।
  • साथ ही, DME एक “कथित‑रूप से” देशी उत्पाद होने की वजह से यह “Atmanirbhar Bharat” के ऊर्जा‑सेक्टर वाले लक्ष्यों से भी जुड़ता है।

Source: https://economictimes.indiatimes.com/news/india/pune-based-scientists-develop-synthetic-gas-that-can-become-an-alternative-to-lpg/articleshow/129607597.cms?from=mdr

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