Spread the love पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले मतदाता सूची संशोधन (SIR) प्रक्रिया के दौरान सात न्यायिक अधिकारियों को करीब नौ घंटे तक बंधक बनाए जाने की घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने इस मामले को गंभीर बताते हुए केंद्र बलों की तैनाती और जांच के आदेश दिए हैं। क्या है पूरा मामला? मालदा जिले के कालियाचक-II ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस (BDO) के बाहर बुधवार को SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर विरोध प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों से मिलने की मांग की, लेकिन अनुमति नहीं मिलने पर उन्होंने शाम करीब 4 बजे BDO कार्यालय का घेराव कर दिया। इस दौरान सात न्यायिक अधिकारियों, जिनमें तीन महिलाएं शामिल थीं, को बंधक बना लिया गया। इनमें से एक अधिकारी का पांच साल का बच्चा भी अंदर मौजूद था। Unprecedented developments in West Bengal.The Kaliachak-II BDO office was under siege. North Bengal and South Bengal were effectively cut off, with protesters blocking NH-12. Seven judicial officers, including three women, were trapped inside. The situation had spiralled out of… pic.twitter.com/AvYGOAzxMh— Amit Malviya (@amitmalviya) April 1, 2026 SIR प्रक्रिया क्यों बनी विवाद का कारण? चुनाव से पहले चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत अंतिम मतदाता सूची में 63 लाख से अधिक नाम हटाए गए हैं, जबकि करीब 60 लाख मतदाताओं को “अंडर एडजुडिकेशन” श्रेणी में रखा गया है। इन मामलों की समीक्षा करने के लिए ही न्यायिक अधिकारी तैनात किए गए थे, ताकि तय किया जा सके कि किन मतदाताओं के नाम सूची में बने रहें या हटाए जाएं। यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर चल रही थी। कैसे हुआ बचाव? करीब नौ घंटे बाद, रात लगभग 1 बजे पुलिस टीम ने सभी अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस वाहनों पर पथराव भी किया। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में पुलिस वाहनों का पीछा करते प्रदर्शनकारी और क्षतिग्रस्त गाड़ियों के दृश्य देखे गए। विरोध प्रदर्शन आसपास के इलाकों में भी फैल गया, जहां NH-12 को बांस और फर्नीचर लगाकर जाम किया गया और टायर जलाए गए। सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी गुरुवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना को अदालत की अधिकारिता को चुनौती देने का प्रयास बताया। कोर्ट ने राज्य सरकार पर कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे “गंभीर प्रशासनिक विफलता” कहा। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि रात 11 बजे तक जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं थे और एक पांच साल के बच्चे को भोजन और पानी तक नहीं मिला। अधिकारियों को अंततः कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के हस्तक्षेप के बाद छोड़ा गया। “सबसे ज्यादा ध्रुवीकृत राज्य” टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल को “सबसे अधिक ध्रुवीकृत राज्य” बताते हुए कहा कि यहां हर मुद्दे पर राजनीतिक दृष्टिकोण हावी है, यहां तक कि अदालत के आदेशों के पालन में भी राजनीति दिखती है। कोर्ट के निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए: सभी न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती जिन अधिकारियों को खतरा है, उनके घरों पर भी सुरक्षा उपलब्ध कराना घटना की जांच CBI या NIA को सौंपने के निर्देश BDO कार्यालय में एक समय में 3-5 से अधिक लोगों के प्रवेश पर रोक साथ ही, मुख्य सचिव, डीजीपी और जिला मजिस्ट्रेट को नोटिस जारी कर 6 अप्रैल को कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया गया है। राजनीतिक प्रतिक्रिया भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने राज्य सरकार पर स्थिति को नियंत्रण में रखने में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि अधिकारियों को लगातार धमकियां दी गईं और उन पर हमले की योजना भी बनाई गई थी। यह घटना पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव (23 और 29 अप्रैल) से पहले सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। Source: https://www.indiatoday.in/india/story/collector-was-absent-till-11-pm-cji-raps-bengal-after-sir-judicial-officers-held-hostage-2890519-2026-04-02 Post navigation 2026 में 15000 की रेंज में बेस्ट फोन: Top 10 5G Smartphones