Spread the love ईरान में मिशन के दौरान अमेरिकी F-35 फाइटर जेट क्षतिग्रस्त, आपात लैंडिंग ईरान के ऊपर एक कॉम्बैट मिशन के दौरान अमेरिकी F-35 स्टेल्थ फाइटर जेट क्षतिग्रस्त हो गया, जिसके बाद उसे मध्य-पूर्व में स्थित अमेरिकी एयरबेस पर आपात लैंडिंग करनी पड़ी। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, पायलट सुरक्षित है और उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। घटना की जांच जारी है। ईरान का दावा और अमेरिकी प्रतिक्रिया इस घटनाक्रम के बीच ईरान ने दावा किया है कि उसने अपने एयर डिफेंस सिस्टम के जरिए इस विमान को निशाना बनाया। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो यह पहली बार होगा जब ईरान ने अमेरिका के सबसे उन्नत लड़ाकू विमानों में से एक को निशाना बनाया हो। हालांकि, वॉशिंगटन ने इस दावे की पूरी तरह पुष्टि नहीं की है, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने यह स्वीकार किया है कि विमान को संभवतः ईरानी फायरिंग से नुकसान पहुंचा। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने बताया कि यह पांचवीं पीढ़ी का जेट ईरान के ऊपर मिशन पर था, जब उसे आपात लैंडिंग करनी पड़ी। उन्होंने कहा, “विमान सुरक्षित रूप से उतरा और पायलट की स्थिति स्थिर है। मामले की जांच की जा रही है।” क्यों महत्वपूर्ण है F-35 पर हमला F-35 लाइटनिंग II को दुनिया के सबसे उन्नत लड़ाकू विमानों में गिना जाता है। यह अमेरिकी और सहयोगी देशों की वायु शक्ति की रीढ़ माना जाता है। इसकी कीमत 100 मिलियन डॉलर से अधिक है और 19 से ज्यादा देश इसे संचालित कर रहे हैं या ऑर्डर दे चुके हैं। यह दुनिया का सबसे व्यापक रूप से तैनात पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट है। स्टेल्थ और उन्नत तकनीक F-35 की सबसे बड़ी खासियत इसकी स्टेल्थ तकनीक है, जो इसे रडार से बचने में मदद करती है। इसके डिजाइन, विशेष सामग्रियों और आंतरिक हथियार प्रणाली के कारण यह भारी सुरक्षा वाले क्षेत्रों में भी आसानी से प्रवेश कर सकता है। इसके अलावा, इसमें सेंसर फ्यूजन तकनीक होती है, जो रडार, इंफ्रारेड सेंसर, सैटेलाइट और अन्य स्रोतों से मिले डेटा को जोड़कर पायलट को रियल-टाइम में पूरी स्थिति की जानकारी देती है। इससे पायलट खतरे का पहले पता लगाकर कार्रवाई कर सकता है। नेटवर्क-आधारित युद्ध क्षमता यह जेट नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर का हिस्सा है, जो अन्य विमानों, जहाजों और जमीनी सिस्टम के साथ डेटा साझा करता है। इस तरह यह सिर्फ एक फाइटर जेट नहीं, बल्कि एक बड़े युद्ध नेटवर्क का अहम हिस्सा होता है। आंशिक नुकसान भी क्यों अहम विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम F-35 को ट्रैक कर नुकसान पहुंचाने में सफल रहा है, तो यह उनकी तकनीकी क्षमता में सुधार या अमेरिकी ऑपरेशन में संभावित खामियों की ओर संकेत कर सकता है। यह घटना इस धारणा को भी चुनौती देती है कि स्टेल्थ विमान पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं और उन्हें निशाना बनाना बेहद मुश्किल होता है। युद्ध में अन्य नुकसान ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, इस संघर्ष के दौरान अब तक अमेरिका के कम से कम 16 विमान खो चुके हैं। इनमें कई MQ-9 रीपर ड्रोन शामिल हैं, जिन्हें ईरानी डिफेंस सिस्टम ने मार गिराया। ये ड्रोन आमतौर पर उच्च जोखिम वाले मिशनों के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। अन्य घटनाओं में कुछ नुकसान दुर्घटनाओं और ‘फ्रेंडली फायर’ के कारण हुए हैं। तीन F-15 फाइटर जेट गलती से कुवैत के एयर डिफेंस द्वारा मार गिराए गए, हालांकि सभी पायलट सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे। इसके अलावा, इराक के पश्चिमी हिस्से में एक KC-135 रीफ्यूलिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें सवार सभी छह लोगों की मौत हो गई। अमेरिकी सेना के अनुसार, यह दुर्घटना किसी हमले के कारण नहीं हुई थी। मौजूदा स्थिति और विश्लेषण इन घटनाओं के बावजूद अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशन योजना के अनुसार जारी हैं। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका को ईरानी हवाई क्षेत्र में पूर्ण वर्चस्व नहीं, बल्कि केवल कुछ क्षेत्रों में सीमित बढ़त हासिल हुई है। दूसरी ओर, ईरान लगातार क्षेत्रीय हमले कर रहा है, जिनमें ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया जा रहा है। साथ ही, ईरान ने दावा किया है कि उसने बड़ी संख्या में अमेरिकी और इजरायली ड्रोन मार गिराए हैं। ईरान का कहना है कि F-35 पर हमला उसकी एकीकृत एयर डिफेंस प्रणाली में हुए सुधारों का परिणाम है। Source: https://timesofindia.indiatimes.com/defence/international/worlds-first-hit-iran-claims-strike-on-us-f-35-lightning-2-why-its-a-big-deal/articleshow/129692213.cms Post navigation रणवीर सिंह की ‘धुरंधर 2’ ने पहले दिन रचा इतिहास, 100 करोड़ क्लब में एंट्री