Spread the love एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में पाया गया है कि कम प्रोटीन वाला आहार क्षतिग्रस्त लिवर में ट्यूमर की वृद्धि को धीमा कर सकता है। यह शोध बताता है कि जब लिवर सही तरीके से अमोनिया को बाहर नहीं निकाल पाता, तो यही सामान्य तत्व कैंसर की वृद्धि को बढ़ावा दे सकता है। अमोनिया का बढ़ना ट्यूमर वृद्धि से जुड़ा सामान्य परिस्थितियों में लिवर अमोनिया को यूरिया में बदलकर शरीर से बाहर निकाल देता है। लेकिन जब लिवर की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, तो अमोनिया शरीर में जमा होने लगता है।अध्ययन में पाया गया कि लिवर में अमोनिया का स्तर बढ़ने पर ट्यूमर तेजी से बढ़ता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि खराब वेस्ट प्रोसेसिंग कैंसर के विकास को बढ़ावा दे सकती है। इसे भी पढ़ें: बुरांश (उत्तराखंड का राज्य पुष्प) के फायदे और नुकसान: क्या यह सच में हेल्दी है? शोध में सामने आया मुख्य कारण रटगर्स यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की टीम ने पाया कि लिवर कोशिकाओं में अमोनिया को सही तरीके से प्रोसेस न कर पाना इस समस्या का मुख्य कारण है।जब अमोनिया डिटॉक्सिफाई नहीं हो पाता, तो यह ऐसे पदार्थों में बदल जाता है जिन्हें कैंसर कोशिकाएं अपनी वृद्धि के लिए उपयोग करती हैं। लिवर में अमोनिया की भूमिका स्वस्थ लिवर में प्रोटीन टूटने के दौरान बनने वाला अमोनिया “यूरिया साइकिल” के जरिए यूरिया में बदलकर बाहर निकाल दिया जाता है।लेकिन लिवर रोग या कैंसर की स्थिति में यह प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है, जिससे अमोनिया रक्त और लिवर ऊतकों में जमा हो जाता है। यह अतिरिक्त नाइट्रोजन ट्यूमर को DNA बनाने और कोशिका विभाजन में मदद करता है। ट्यूमर अमोनिया को विकास सामग्री में बदलते हैं शोधकर्ताओं ने पाया कि लिवर ट्यूमर अमोनिया को अमीनो एसिड और न्यूक्लियोटाइड में बदल देते हैं।ये दोनों तत्व कोशिकाओं के तेजी से बढ़ने और जेनेटिक सामग्री बनाने के लिए जरूरी होते हैं, जिससे ट्यूमर तेजी से फैलता है। कम प्रोटीन से ट्यूमर वृद्धि में कमी अध्ययन के दौरान ट्यूमर-प्रवण चूहों को कम प्रोटीन वाला आहार दिया गया।इससे शरीर में नाइट्रोजन की मात्रा कम हुई और अमोनिया का उत्पादन घटा। परिणामस्वरूप ट्यूमर की वृद्धि धीमी हुई और कई मॉडलों में जीवित रहने की अवधि बढ़ी। इसे भी पढ़ें: केले के छिलके के फायदे: सिर्फ कचरा नहीं, कई तरह से हो सकता है उपयोगी सभी के लिए उपयुक्त नहीं है यह आहार विशेषज्ञों का कहना है कि कम प्रोटीन आहार सभी मरीजों के लिए सही नहीं है।कैंसर मरीजों को अक्सर मांसपेशियों की ताकत बनाए रखने और रिकवरी के लिए पर्याप्त प्रोटीन की जरूरत होती है। अत्यधिक कमी से कमजोरी या कुपोषण का खतरा बढ़ सकता है। अमोनिया नियंत्रण का महत्व शोधकर्ताओं ने कुछ एंजाइम्स को निष्क्रिय कर अमोनिया डिटॉक्स प्रक्रिया को बाधित किया।हर बार अमोनिया स्तर बढ़ा, ट्यूमर तेजी से बढ़ा और जीवित रहने की संभावना घट गई। इससे पता चलता है कि समस्या किसी एक कारण से नहीं बल्कि अमोनिया नियंत्रण की व्यापक विफलता से जुड़ी है। लिवर रोग वाले लोगों में अधिक जोखिम हेपेटाइटिस, फैटी लिवर, शराब से जुड़ी क्षति या लिवर कैंसर वाले लोगों में अमोनिया को बाहर निकालने की क्षमता कम हो सकती है।ऐसे लोगों के लिए प्रोटीन सेवन को डॉक्टर की सलाह से नियंत्रित करना जरूरी हो सकता है। ट्यूमर के अंदर अतिरिक्त प्रभाव कम प्रोटीन आहार से न केवल अमोनिया कम हुआ, बल्कि ट्यूमर कोशिकाओं की वृद्धि, फाइब्रोसिस से जुड़ी गतिविधियां और ग्रोथ सिग्नलिंग भी कम देखी गई।ये सभी बदलाव तेजी से कोशिका विभाजन के लिए आवश्यक नाइट्रोजन की कमी के अनुरूप हैं। मानव अध्ययन की आवश्यकता हालांकि ये निष्कर्ष आशाजनक हैं, लेकिन यह अध्ययन जानवरों पर आधारित है।मानवों पर आगे के क्लिनिकल ट्रायल जरूरी हैं, ताकि सुरक्षित प्रोटीन स्तर और सही उपचार पद्धति तय की जा सके। निष्कर्ष यह अध्ययन संकेत देता है कि लिवर कैंसर की प्रगति इस बात पर निर्भर हो सकती है कि शरीर अमोनिया जैसे अपशिष्ट को कितनी प्रभावी तरीके से नियंत्रित करता है।भविष्य में आहार या चिकित्सा पद्धतियों के जरिए इस प्रक्रिया को लक्षित करना एक संभावित उपचार विकल्प बन सकता है। Source: https://sundayguardianlive.com/science/lower-protein-intake-may-slow-liver-tumour-growth-in-damaged-livers-study-178319/ Post navigation IPL 2026: चोटिल खिलाड़ियों की पूरी लिस्ट, KKR सबसे ज्यादा प्रभावित चार महीने में भारत में शुरू होगा कार्बन मार्केट ट्रेडिंग: केंद्रीय ऊर्जा मंत्री