Spread the love ईरान और अमेरिका-इज़राइल के बीच जारी संघर्ष अब एक नए और खतरनाक चरण में प्रवेश कर चुका है। पिछले तीन हफ्तों में यह युद्ध केवल सैन्य टकराव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब ऊर्जा संसाधनों पर सीधे हमलों के कारण “ऊर्जा युद्ध” में बदलता नजर आ रहा है। हाल के घटनाक्रम में ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमले के बाद, तेहरान ने कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के गैस संयंत्रों को निशाना बनाकर जवाब दिया। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और बढ़ गई है। ऊर्जा अब युद्ध का मुख्य हथियार इस सप्ताह पहली बार दोनों पक्षों ने तेल और गैस उत्पादन से जुड़े ठिकानों पर सीधे हमले किए। इससे साफ संकेत मिलता है कि अब ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर इस युद्ध का प्रमुख लक्ष्य बन चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन सकता है, क्योंकि ऊर्जा सप्लाई में बाधा का असर हर देश पर पड़ता है। साउथ पार्स गैस फील्ड क्यों है अहम? साउथ पार्स गैस फील्ड दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस भंडार है, जिसमें लगभग 1,800 ट्रिलियन क्यूबिक फीट गैस मौजूद है। यह वैश्विक LNG सप्लाई का प्रमुख स्रोत है भारत समेत कई देश इस पर निर्भर हैं ईरान की लगभग 80% बिजली इसी गैस से बनती है इस पर हमले के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में तेजी देखी गई। BREAKING: Middle East tensions are spiraling. Israel has struck Iran’s South Pars gas field, which is the world’s largest natural gas field. Oil just jumped to $108/barrel!Israel just warned that it will destroy all bridges on Lebanon’s Litani River. This is a major escalation.… pic.twitter.com/zKWRtZux8H — Ed Krassenstein (@EdKrassen) March 18, 2026 कतर और UAE भी आए निशाने पर ईरान ने जवाबी कार्रवाई में कतर के रास लाफान LNG प्लांट और UAE के हबशन गैस प्लांट को निशाना बनाया। हालांकि, अधिकांश मिसाइलें एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा रोक ली गईं। UAE ने इस हमले को “आतंकी कार्रवाई” बताते हुए वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा बताया है। भारत पर क्या होगा असर? भारत दुनिया के सबसे बड़े LNG आयातकों में से एक है और अपनी गैस जरूरतों के लिए कतर और सऊदी अरब पर काफी निर्भर है। भारत की 80-85% LPG सप्लाई इन्हीं देशों से आती है LNG का उपयोग उर्वरक, CNG और घरेलू PNG में होता है सप्लाई बाधित होने पर कीमतों में तेजी आ सकती है यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो भारत में गैस और ईंधन महंगे हो सकते हैं। वैश्विक बाजार में उथल-पुथल इस संघर्ष का असर तुरंत बाजार में दिखा: ब्रेंट क्रूड ऑयल 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया गैस कीमतों में करीब 6% उछाल अमेरिका में पेट्रोल कीमतें सितंबर 2023 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर विशेषज्ञों के अनुसार, ऊर्जा ढांचे को नुकसान होने पर उसे ठीक करने में वर्षों लग सकते हैं। क्या आगे और बढ़ेगा संकट? इतिहास बताता है कि युद्ध के दौरान ऊर्जा संसाधनों को हुए नुकसान से उबरने में लंबा समय लगता है। 2003 में इराक युद्ध के बाद भी उत्पादन सामान्य होने में करीब 2 साल लगे थे। वर्तमान हालात को देखते हुए साफ है कि: आर्थिक दबाव इस युद्ध की मुख्य रणनीति बन चुका है सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ सकता है यह संघर्ष लंबा चल सकता है निष्कर्ष ईरान-इज़राइल युद्ध अब केवल सैन्य संघर्ष नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा संकट का रूप ले चुका है। ऊर्जा संसाधनों पर हमलों ने पूरी दुनिया को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। भारत समेत कई देशों के लिए आने वाले समय में ईंधन और गैस की कीमतें एक बड़ी चुनौती बन सकती हैं। Source: https://www.indiatoday.in/world/story/iran-south-pars-gasfield-strike-india-impact-war-dangerous-phase-energy-sites-2884041-2026-03-19 Post navigation Israel ने किया बड़ा दावा: क्या मारे गए ईरान के सबसे ताकतवर अधिकारी? Iran War Update: यूरोप-जापान की एंट्री, तेल बाजार में मचा हड़कंप