Dawood Ibrahim linked to Karachi addresses in UN report amid ongoing debate over whether he is dead or alive and Pakistan’s denial
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भारत के मोस्ट वांटेड आतंकी दाऊद इब्राहिम को लेकर एक बार फिर सवाल उठ खड़ा हुआ है—क्या वह जिंदा है या मर चुका है? फिल्म धुरंधर 2 की रिलीज के बाद यह मुद्दा फिर सुर्खियों में आ गया है, जिसमें “बड़े साहब” नाम का किरदार इसी रहस्य से जुड़ा दिखाया गया है।

दाऊद का भारत से पलायन और दुबई में ठिकाना

1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट का मास्टरमाइंड दाऊद इब्राहिम भारत से अचानक नहीं भागा था, बल्कि उसने पहले से पूरी योजना बनाई थी। वह पैसे, नेटवर्क और कथित तौर पर पड़ोसी देश पाकिस्तान के समर्थन के साथ देश छोड़कर गया।

1980 के दशक की शुरुआत तक दाऊद दुबई में खुलेआम रह रहा था। वहां वह एक डॉन के रूप में स्थापित हो चुका था। आलीशान घर, महंगी गाड़ियां और बॉलीवुड से जुड़ी मौजूदगी उसकी पहचान बन चुकी थी।

मुंबई धमाकों के बाद दुबई पर दबाव

1993 में मुंबई में 13 सिलसिलेवार धमाकों ने देश की आर्थिक राजधानी को हिला दिया। इन हमलों में सैकड़ों लोगों की मौत हुई और हजारों घायल हुए। इसके बाद दुबई पर कार्रवाई का दबाव बढ़ा और करीब 1994 में दाऊद ने पाकिस्तान के कराची में शरण ले ली।

पाकिस्तान के इनकार और दस्तावेजी विरोधाभास

पिछले 32 वर्षों से पाकिस्तान दाऊद की मौजूदगी से इनकार करता रहा है। हालांकि, कई रिपोर्ट्स और देखे जाने की घटनाएं इस दावे के विपरीत हैं।

अगस्त 2020 में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के दबाव में पाकिस्तान ने 88 व्यक्तियों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाया, जिसमें दाऊद इब्राहिम का नाम और कराची के पते भी शामिल थे।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की 11 जून 2025 की सूची में भी दाऊद के पाकिस्तान स्थित तीन पते दर्ज हैं, जिनमें कराची के क्लिफ्टन क्षेत्र का “व्हाइट हाउस” भी शामिल है।

अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड में दर्ज अपराध

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, दाऊद इब्राहिम ने अपनी आपराधिक गतिविधियों के जरिए अल-कायदा को समर्थन दिया। यह वही आतंकी संगठन है जिसकी स्थापना ओसामा बिन लादेन ने की थी।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दाऊद ने दक्षिण एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका के जरिए नशीले पदार्थों की तस्करी का नेटवर्क चलाया। इसके अलावा, लश्कर-ए-तैयबा को भी आर्थिक मदद देने का आरोप दर्ज है।

2003 में अमेरिका ने दाऊद को “स्पेशली डिज़िग्नेटेड ग्लोबल टेररिस्ट” घोषित किया था।

संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध और पाकिस्तान की जिम्मेदारी

नवंबर 2003 से दाऊद इब्राहिम संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में शामिल है। इस सूची के तहत उस पर संपत्ति फ्रीज, यात्रा प्रतिबंध और हथियारों पर रोक जैसे प्रावधान लागू हैं।

पाकिस्तान, संयुक्त राष्ट्र का सदस्य होने के नाते, इन नियमों का पालन करने के लिए बाध्य है। बावजूद इसके, इस दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं दिखती।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का रुख

भारत ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाया है। 7 अगस्त 2020 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के प्रतिनिधि ने कहा कि डी-कंपनी, जो पहले सोने की तस्करी और नकली नोटों के कारोबार में शामिल थी, बाद में एक आतंकी संगठन में बदल गई।

उन्होंने यह भी कहा कि 1993 मुंबई धमाकों का आरोपी आज भी एक पड़ोसी देश में संरक्षण पा रहा है, जो हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी का केंद्र माना जाता है।

फिल्म से फिर चर्चा में आया मुद्दा

आज सिनेमाघरों में रिलीज हुई धुरंधर: द रिवेंज ने एक बार फिर इस मुद्दे को लोगों के सामने ला दिया है। हालांकि, दाऊद इब्राहिम कोई काल्पनिक किरदार नहीं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा सूचीबद्ध वैश्विक आतंकी है।

बड़ा सवाल अब भी कायम

तीन दशक बाद भी यह सवाल बना हुआ है कि दाऊद इब्राहिम जिंदा है या नहीं। संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका द्वारा नामित इस आतंकी की मौजूदगी को लेकर पाकिस्तान का रुख सवालों के घेरे में है।

भारत के लिए यह सिर्फ एक व्यक्ति का मुद्दा नहीं, बल्कि आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी से जुड़ा बड़ा प्रश्न है।

Source: https://www.msn.com/en-in/news/world/dhurandhar-2-revives-the-dawood-ibrahim-mystery-dead-or-alive-tracing-pakistans-missing-man/ar-AA1YWgIh?ocid=BingNewsSerp

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