Spread the love ईरान ने पारंपरिक परमाणु हथियार के बजाय एक अलग रणनीतिक ताकत विकसित कर ली है—हॉर्मुज़ स्ट्रेट पर उसका नियंत्रण। यह क्षमता वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है और अमेरिका के लिए नई चुनौती बन गई है। ऐसे में वॉशिंगटन को अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है। हॉर्मुज़: रणनीतिक दबाव का नया साधन दशकों से अमेरिका और इज़राइल, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंतित रहे हैं। उनका मानना रहा है कि यदि ईरान परमाणु हथियार हासिल करता है, तो इससे मध्य-पूर्व में हथियारों की होड़ और अस्थिरता बढ़ सकती है। हालांकि, हालिया घटनाओं से संकेत मिलता है कि ईरान ने बिना किसी वास्तविक परमाणु विस्फोट के भी एक प्रभावी ‘रणनीतिक हथियार’ विकसित कर लिया है—हॉर्मुज़ स्ट्रेट । यह मार्ग दुनिया के लगभग 20% समुद्री तेल और गैस व्यापार के लिए बेहद अहम है। इसे भी पढ़े: ईरान में अमेरिकी एयरमैन रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान ट्रंप को कंट्रोल रूम से रखा गया दूर “डिटरेंस बाय डिसरप्शन” की रणनीति परमाणु हथियार जहां बड़े पैमाने पर विनाश की धमकी देकर रोकथाम (deterrence) पैदा करते हैं, वहीं ईरान ने हॉर्मुज़ में जहाजों की आवाजाही को बाधित कर समान प्रभाव हासिल किया है। ईरान ने टैंकरों को चेतावनी दी और कुछ पर हमले भी किए, जिससे बीमा कंपनियों और जहाज मालिकों ने जोखिम बढ़ा हुआ मानते हुए अपने शुल्क बढ़ा दिए। इसके परिणामस्वरूप: तेल परिवहन में तेजी से गिरावट आई बंदरगाहों पर कच्चा तेल जमा होने लगा तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं उत्पादन में कमी या रुकावट देखी गई इस स्थिति ने दशकों के सबसे बड़े तेल संकट का संकेत दिया। अमेरिकी रणनीति पर असर अमेरिका ने ईरान के परमाणु और मिसाइल ठिकानों पर हवाई हमले कर उसकी क्षमताओं को कमजोर करने की कोशिश की है। इन हमलों से कुछ हद तक सफलता भी मिली, लेकिन इससे हॉर्मुज़ पर ईरान की पकड़ कमजोर नहीं हुई। विशेषज्ञों के अनुसार, केवल यूरेनियम भंडार को जब्त करना या परमाणु सुविधाओं को नुकसान पहुंचाना अल्पकालिक समाधान है। असली चुनौती हॉर्मुज़ पर नियंत्रण हासिल करना है। हॉर्मुज़ पर ‘नियंत्रण’ की कोशिश अमेरिकी नौसेना द्वारा हॉर्मुज़ के आसपास तैनाती बढ़ाना इस दिशा में एक संकेत माना जा रहा है। युद्धपोतों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि अमेरिका अब हवाई हमलों से आगे बढ़कर समुद्री रणनीति अपना रहा है। इसके साथ ही: समुद्री मार्गों की निगरानी बारूदी सुरंगों को हटाने के अभियान जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना जैसे कदम अमेरिका की ‘गार्डियन’ भूमिका को दर्शाते हैं। दीर्घकालिक चुनौती और संभावित प्रभाव विशेषज्ञों का मानना है कि हॉर्मुज़ को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव लंबा चल सकता है। ईरान छोटे युद्धपोतों, मिसाइलों और ड्रोन के जरिए इस मार्ग को बाधित करने की क्षमता रखता है। इस स्थिति में अमेरिका को: स्थायी सैन्य तैनाती बढ़ानी पड़ सकती है वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के वैकल्पिक रास्ते विकसित करने होंगे भारत, चीन जैसे देशों के साथ ऊर्जा सहयोग बढ़ाना होगा नई पाइपलाइन परियोजनाएं और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत विकसित करना समय और भारी निवेश मांगेगा। हॉर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर बढ़ता तनाव यह दर्शाता है कि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों तक सीमित नहीं है, बल्कि रणनीतिक भूगोल भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि अमेरिका इस चुनौती का सामना करना चाहता है, तो उसे लंबी अवधि की सैन्य, कूटनीतिक और आर्थिक रणनीति के लिए तैयार रहना होगा। Source: https://www.ndtv.com/world-news/iran-found-its-nuclear-weapon-now-the-us-has-to-adapt-11391821?pfrom=home-ndtv_topscroll_Imagetopscroll Post navigation ईरान में अमेरिकी एयरमैन रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान ट्रंप को कंट्रोल रूम से रखा गया दूर: रिपोर्ट