उत्तराखंड : हो जाए सतर्क अब पहाड़ी क्षेत्रों में भी बढ़ने लगा कोरोना का खतरा

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उत्तराखंड में कोरोना की दूसरी लहर अब नौ पहाड़ी जिलो में आफत बनने लगी है। अब तक इस मामले में राज्य के इस बड़े क्षेत्र को कोरोना के लिहाज से काफी सुरक्षित माना जा रहा था। लेकिन लगातार राज्य में आवाजाही और लापरवाही के चलते लोगों में संक्रमण धीरे-धीरे बढ़ने लगा है। ग्रामीण इलाकों में साफ तौर पर लापरवाही देखने को मिल रही है। जागरूकता को लेकर की जा रही लाख कोशिशों के बावजूद लोग कोरोना के भयावाह परिणामों से भी विचलित नहीं हो रहे हैं।

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अब पहाड़ी क्षेत्रों में भी लगातार बढ़ रहा है कोरोना का खतरा

शुरुआती चरण में मैदानी जिलों में ही ज्यादा संक्रमित मिल रहे थे, पर अब पहाड़ में लगातार तेजी से कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं। एक से दस मई के बीच की स्थिति देखें तो प्रदेश में 27.6 फीसद मामले नौ पर्वतीय जनपदों में सामने आए हैं।पहाड़ में गढ़वाल मंडल के सबसे ज्यादा प्रभावित टिहरी, पौड़ी और उत्तरकाशी है। जबकि कुमाऊं के पिथौरागढ़, बागेश्वर और रुद्रप्रयाग में मामले तुलनात्मक रूप से थोड़ा कम हैं। यही हालात और आंकड़े चिंताजनक स्थिति की तरफ इशारा कर हैं। क्योंकि पर्वतीय जनपदों में जांच की रफ्तार बेहद सुस्त है, और संक्रमण दर दिन-ब-दिन तेजी से बढ़ रही है। मतलब साफ है कि कम जांच के बावजूद काफी ज्यादा लोग संक्रमित मिल रहे हैं।

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पहाड़ो में कोरोना का बढ़ना चिंता का विषय

सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटी फाउंडेशन के अध्यक्ष अनूप नौटियाल का कहना है कि पहाड़ में जिस तेजी से कोरोना का संक्रमण बढ़ रहा है, उसे रोकने के लिए एक ठोस रणनीति की जरूरत है। चिंता इस बात की है कि पहाड़ में स्वास्थ्य का आधारभूत ढांचा भी उतना सुदृढ़ नहीं है। ऐसे में हालात बिगड़े तो जनहानि काफी ज्यादा होगी। चिंता इस बात की है कि पहाड़ों में जांच अब भी बेहद कम की जा रही

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