समय पर खामी का पता न चलता तो अंतरिक्ष में खो सकता था ‘चंद्रयान 2’

चंद्रयान-2
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग में अब कम से कम 2 महीने का समय और लग सकता है। इस हिसाब से इसरो के मिशन मून का सितम्बर से पहले लॉन्च होना संभव नहीं है। इससे पहले चंद्रयान-2 को लांच करने का तय समय 15 जुलाई को तड़के 2 बजकर 51 मिनट पर रखा गया था। लेकिन तय समय से ठीक 56 मिनट 24 सेकेण्ड पहले इसकी लॉन्चिंग को रोका गया। यह फैसला चंद्रयान-2 को मंजिल तक पहुंचाने वाले रॉकेट ‘जीएसएलवी-एमके 3’ में कुछ तकनीकी खराबी के कारण लिया गया।

सही समय पर चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण को रोककर वैज्ञानिकों ने बहुत बड़ा नुकसान होने से बचा लिया। ऐसे में यदि जीएसएलवी-एमके 3 में इस खामी का पता न चलता तो क्या होता?

  • इस स्थिति में चंद्रयान-2 लॉन्च होने के बाद तय सीमा से पहले ही रॉकेट से अलग हो जाता और पृथ्वी की ही किसी कक्षा में भटक जाता। फिर उसे उसकी निर्धारित कक्षा में पहुंचाने में बहुत मस्सकत करनी पड़ती, साथ ही इस दूरी को तय करने में चंद्रयान-2 का काफी ईंधन भी खत्म हो जाता।

  • मिशन के अनुसार चंद्रयान-2 को पृथ्वी के चारों ओर अंडाकार कक्षा में 5 चक्कर लगाने हैं। यह मिशन उस वक्त किया जा रहा था जब चाँद, पृथ्वी के काफी नजदीक था। इसलिए इस स्थिति में चंद्रयान के पहुंचने पर चाँद की दिशा भी बदल जाती, जिससे चंद्रयान को चाँद की यात्रा के लिए ज्यादा दूरी भी तय करनी पड़ती।
  • अगर किसी तरीके से वैज्ञानिक चंद्रयान-2 को चाँद तक पहुंचाने में सफल भी हो जाते, तो उसके बाद चंद्रयान-2 में इतना ईंधन नहीं रह जाता कि वह चाँद के चारों तरफ 5 चक्कर लगा सके।
  • इसके अलावा जीएसएलवी-एमके 3 में खराबी के कारण पृथ्वी से कुछ ऊपर जाकर इसमें विस्फोट हो सकता था। जिससे चंद्रयान ख़त्म भी हो सकता था या फिर अंतरिक्ष में वैज्ञानिकों के नियंत्रण से बाहर जा सकता था।