काम की खबर: दिवाली-धनतेरस पर सरकार बेच रही है सस्ता सोना, 13 नवंबर तक खरीदें

Cheap Sovereign gold
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धनतेरस और दिवाली के समय में सोना खरीदना काफी शुभ माना जाता है। हर भारतीय परिवार में इस त्योहारी मौसम में बहुत छोटे पैमाने पर ही सही, लेकिन सोने की खरीद की परंपरा है। इस दौरान कुछ लोग निवेश के लिहाज से भी सोना खरीदते हैं। एक ओर जहां सोने की कीमत पिछले कई दिनों से बढ़ रही है, वहीं केंद्र सरकार ने जनता को सस्ती दरों पर सोना खरीदने का मौका दिया है। निवेशक सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (Sovereign Gold Bond) योजना के तहत बाजार मूल्य से काफी कम दाम में सोना खरीद सकते हैं।

यह योजना सिर्फ पांच दिन के लिए है। इसलिए अगर आप इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं, तो देर ना करें। आज इसका पहला दिन है। इसकी बिक्री पर होने वाले लाभ पर आयकर नियमों के तहत छूट के साथ और कई लाभ मिलेंगे। वित्त वर्ष 2020-21 के लिए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की यह आठवीं सब्सक्रिप्शन सीरीज है। अगर आप गोल्ड बॉन्ड में निवेश करना चाहते हैं तो 13 नवंबर तक मौका है। यानी आप 9 नवंबर से 13 नवंबर तक इस योजना में निवेश कर सकते हैं।

इस बार आरबीआई ने सोने की इश्यू प्राइस 5177 रुपये प्रति ग्राम तय की है। रिजर्व बैंक के मुताबिक ऑनलाइन आवेदन करने वाले निवेशकों के लिए प्रति ग्राम पर 50 रुपये की छूट मिलेगी। यानी एक ग्राम सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के लिए 5,127 रुपये भुगतान करना होगा। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना 2020-21 की सातवीं सीरीज के तहत पिछले महीने 12 से 16 अक्टूबर के बीच ओपन हुआ था, तब एक ग्राम गोल्ड बॉन्ड का दाम RBI ने 5,051 रुपये निर्धारित किया था ।

बता दें, इस सरकारी गोल्‍ड बॉन्ड की कीमत बाजार में चल रहे सोने की रेट से कम होती है। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना में गोल्‍ड की कीमत रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से तय की जाती है। इस बॉन्ड में न्यूनतम निवेश एक ग्राम का होता है। इसपर टैक्‍स भी छूट मिलती है। इसके अलावा स्‍कीम के जरिए बैंक से लोन भी लिया जा सकता है।

कितना खरीद सकते हैं सोना

आरबीआई भारत सरकार की तरफ से सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जारी करता है। इस बॉन्ड में निवेश एक ग्राम के गुणकों में किया जाता है, जिसकी अधिकतम सीमा एक व्यक्ति के लिए एक साल में 500 ग्राम है। वहीं हिन्दू संयुक्त परिवार एक साल के दौरान अधिकतम 4 किलोग्राम सोने की कीमत के बराबर तक का बॉन्ड खरीद सकते हैं। ट्रस्ट और वित्तीय वर्ष के समान इकाइयों के मामले में निवेश की ऊपरी सीमा 20 किलोग्राम है।

बॉन्‍ड खरीदने के फायदे

जैसे ही सोने की कीमतों में इजाफा होता है, वैसे ही गोल्ड बॉन्ड निवेशकों को इसका फायदा मिलता है। ये बॉन्‍ड पेपर और इलेक्‍ट्रॉनिक फॉर्मेट में होते हैं। जिससे आपको फिजिकल गोल्‍ड की तरह लॉकर में रखने का खर्च भी नहीं उठाना पड़ता। इस गोल्‍ड की बिक्री बैंकों, डाकघरों, एनएसई और बीएसई के अलावा स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के जरिए होती है।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के फायदे

बॉन्‍ड पर सालाना कम से कम ढाई फीसदी का रिटर्न मिलेगा। गोल्ड बॉन्ड में किसी तरह की धोखाधड़ी और अशुद्धता की संभावना नहीं होती है। ये बॉन्ड्स 8 साल के बाद मैच्योर होंगे। मतलब साफ है कि 8 साल के बाद भुनाकर इससे पैसा निकाला जा सकता है। यहीं नहीं, पांच साल के बाद इससे बाहर निकलने का विकल्प भी होता है।

गौरतलब है कि इस योजना की शुरुआत नवंबर 2015 में हुई थी। इसका मकसद भौतिक रूप से सोने की मांग में कमी लाना और सोने की खरीद में घरेलू बचत का इस्तेमाल वित्तीय बचत में करना है।