सचिन पायलट राजस्थान कैबिनेट और प्रदेश अध्यक्ष पद से बर्खास्त, कांग्रेस के पास अब कितने विधायक

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  • सचिन पायलट, विश्वेंद्र सिंह और रमेश मीणा राजस्थान कैबिनेट से बाहर
  • सचिन पायलट से छीना गया राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष का पद
  • बीजेपी के बहकावे में सचिन ने सरकार गिराने की कोशिश की : कांग्रेस

पिछले कुछ दिनों से राजस्थान में चल रही सियासती गहमागहमी के बीच कहानी में अब एक और नया मोड़ आ गया है। मंगलवार की दोपहर को कांग्रेस की विधायक दल की बैठक में गहलोत अपने विधायकों के साथ एकत्रित हुए। इसके बाद सचिन पायलट और उनके दो करीबी मंत्रियों को राजस्थान मंत्रिमंडल से बाहर करने का फैसला किया गया। सचिन के अलावा मंत्रिमंडल से बाहर हुए दो विधायक विश्वेंद्र सिंह और रमेश मीणा हैं। इसके साथ ही कांग्रेस ने सचिन पायलट को कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद से भी बर्खास्त कर दिया गया। सचिन के बाद अब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष का पद राजस्थान के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा को सौंपा गया है।

इसका ऐलान कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने किया। सुरजेवाला ने बताया कि सचिन पायलट, विश्वेंद्र सिंह और रमेश मीणा को मंत्री पद से हटाया गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि पायलट के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग कांग्रेस के विधायक कर रहे थे।

इसके साथ ही सुरजेवाला ने भारतीय जनता पार्टी पर बहुमत की सरकार को अस्थिर करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने हो जाल बिछाया है, उसमें सचिन पायलट और कुछ कांग्रेस के विधायक फंस गए हैं।

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बर्खास्त होने पर पायलट की प्रतिक्रिया

इसके साथ ही सचिन पायलट को मंत्री पद और प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने के फैसले पर अब पायलट की प्रतिक्रिया भी आई है। सचिन पायलट ने अपनी प्रतिक्रिया ट्विटर पर दी। उन्होंने लिखा कि ‘सत्य को परेशान किया जा सकता है, पराजित नहीं।’ इसके साथ ही पायलट ने अपनी ट्विटर बायो से कांग्रेस भी हटा दिया है।

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खतरे में गहलोत सरकार?

हालांकि कांग्रेस ने सचिन पायलट समेत दो अन्य विधायकों को मंत्री पद से हटाने का फैसला कर लिया है। लेकिन अब राजस्थान में कांग्रेस का बहुमत का आंकड़ा भी खतरे में जाता दिख रहा है। दरअसल गहलोत सरकार के साथ माने जाने वाली भारतीय ट्राइबल पार्टी (ITP) के दो विधायकों ने भी कांग्रेस से समर्थन वापस ले लिया है। इसके साथ ही माना जा रहा है कि गहलोत के पास विधायकों की संख्या 100 से नीचे पहुंच गई है। जबकि राजस्थान में सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा 101 है।