लॉकडाउन के कारण हापुड़ में फंसे हिंदू मजदूर, तो पास के मुस्लिमों ने दिया रहने को आसरा

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देशभर में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों और वायरस से मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ने से संकट गहराता जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ निजामुद्दीन मरकज में बड़ी संख्या में जमातियों के मिलने से इस महामारी को भी एक तबका धार्मिक नजरिए से देखने लगा है। लेकिन इसके साथ ही देश के कुछ हिस्सों से उम्मीद भरी खबर भी आ रही हैं। ये खबर आई है यूपी के हापुड़ जिले से, जहां एक मुस्लिम बहुल गांव के लोगों ने लॉकडाउन के चलते कई हिन्दू श्रमिकों को न सिर्फ रहने का ठिकाना दिया बल्कि उनके खाने की व्यवस्था भी की।

कोरोना वायरस के चलते ठप पड़े काम धंधे से कई श्रमिकों का जीवन यापन करना मुश्किल हो गया है। ऐसे ही लॉकडाउन के चलते दिल्ली से करीब 80 किलोमीटर दूर यूपी के हापुड़ जिले में भी आइसक्रीम फैक्टरी बंद करनी पड़ी। जिसके कारण वहां काम करने वाले बिहार चंपारन जिले के रहने वाले 10 श्रमिकों का रोजगार भी छिन गया। अब इन लोगों ने मजबूरन पैदल घर जाने की सोची तो कुछ किलोमीटर दूर पुलिस ने इन्हें रोका और वापस जाने को कह दिया। ऐसी स्थिति में ये लोग पास के एक मुस्लिम बहुल गांव सरवानी में गए। जहां गांव के मुस्लिम इनके लिए मददगार बने। गांव के मुस्लिमों ने बिहार के इन मजदूरों के रहने के लिए ठिकाना भी दिया और साथ ही खाने का भी इंतजाम कर रहे हैं।

परिवार की मदद भी नहीं कर पा रहे श्रमिक

वहीं ये मजदूर अपने परिवार को लेकर भी चिंतित हैं। आइसक्रीम फैक्टरी में काम करने वाले बिहार के इन्हीं मजदूरों में से एक सुग्रीव बताते हैं कि पत्नी से फोन पर बात हुई। वह कहती हैं कि घर पर राशन खत्म होने वाला है। सुग्रीव के परिवार में पत्नी के अलावा चार बच्चे और बूढ़ी मां है। ये सभी सुग्रीव पर ही निर्भर हैं, लेकिन फैक्टरी के बंद होने से सुग्रीव भी परिवार को पैसे नहीं भेज पा रहे हैं।

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सरवानी गांव के शादाब चौधरी बताते हैं कि लॉकडाउन बढ़ने से ये लोग और भी परेशान हो गए हैं। जब भी अपने परिवार से बात करते हैं, तो रोने लगते हैं। फिर हम उन्हें समझाते हैं कि हम उनकी स्थिति को समझ सकते हैं।लेकिन ऐसे समय में अगर उनकी तरह हम भी अपने परिवार से दूर होते तो हमारी स्थिति भी यही होती।