370 हटाने में मोदी सरकार हुई कामयाब, जम्मू-कश्मीर को दो हिस्सों में बांटने वाला बिल भी राज्यसभा में पास

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जम्मू-कश्मीर पर चल रही तमाम आशंकाएं अब दूर हो चुकी हैं। कई दिनों से जम्मू-कश्मीर में सेना और अन्य फोर्सेस की तैनाती बढ़ाने और अमरनाथ यात्रा को रोकने के कारणों का अब पता चल चुका है। दरअसल केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर पर एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। केंद्र की मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से धारा-370 हटाने का फैसला ले लिया है। इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर को दो हिस्सों में बांटने का भी संकल्प पेश किया। इसमें अब तक जम्मू-कश्मीर के साथ होने वाला लद्दाख अब अलग प्रदेश होगा। जबकि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दोनों अब केंद्र शाषित प्रदेश होंगे। केंद्र शाषित प्रदेश होने के बावजूद जम्मू-कश्मीर में अपनी विधायिका होगी लेकिन लद्दाख में विधान सभा नहीं होगी।

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दिन भर चली जोरदार बहस और विरोध के बाद भी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पेश किया गया जम्मू-कश्मीर का पुर्नरगठन बिल राज्यसभा में बहुमत के साथ आसानी से पास भी हो गया है। राज्यसभा में जहाँ 125 वोट इस पुनर्गठन बिल के पक्ष में पड़े वहीँ मात्र 61 वोट विपक्ष में। इस बिल के समर्थन में बीजेडी, टीडीपी, एआईएडीएमके, वाईएसआरसीपी के अलावा आप और बीएसपी ने भी बीजेपी का समर्थन किया।

गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में पेश करते हुए बताया कि संविधान के अनुच्छेद-370 के सभी खंड जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं होंगे। उन्होंने कहा “महोदय, मैं संकल्प प्रस्तुत करता हूं कि यह सदन अनुच्छेद 370(3) के अंतर्गत भारत के राष्ट्रपति द्वारा जारी की जाने वाली निम्नलिखित अधिसूचनाओं की सिफारिश करता है। संविधान के अनुच्छेद 370(3) के अंतर्गत भारत के संविधान के अनुच्छेद 370 खंड 1 के साथ पठित अनुच्छेद 370 के खंड 3 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति संसद की सिफारिश पर यह घोषणा करते हैं कि यह दिनांक जिस दिन भारत के राष्ट्रपति द्वारा इस घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए जाएंगे और इसे सरकारी गैजेट में प्रकाशित किया जाएगा उस दिन से अनुच्छेद 370 के सभी खंड लागू नहीं होंगे, सिवाय खंड 1 के”

किसी ने फाड़ा कुर्ता तो किसी ने बताया ‘काला दिन’

मोदी सरकार के जम्मू-कश्मीर के पुर्नगठन बिल को विपक्ष के कड़े विरोध का भी सामना करना पड़ा। राज्यसभा में कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद ने इसे लोकतंत्र का काला दिन बताया तो वहीँ पीडीपी सांसद फैयाज जोरदार ने संसद में पुर्नगठन बिल के खिलाफ नारे लगाते हुए अपना कुर्ता ही फाड़ दिया।
वहीँ जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने पहले ट्वीट और फिर एक ऑडियो जारी करते हुए कहा कि आज भारतीय लोकतंत्र का काला दिन है। इसी तरह राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 को हटाना जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ धोखा है। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत सरकार के इस फैसले से भयानक नतीजे सामने आएंगे।