मायके गई थी मां, लौटकर आई तो तबाही का मंजर देख हो गई बेहोश

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हर साल बारिश का मौसम उत्तराखण्ड के पहाड़ी इलाकों के लिए आफत बनकर आता है। इस मौसम में आए दिन भूस्खलन से बड़े हादसे होते हैं। कई लोग इन हादसों को केवल कुदरत का कहर बोलकर टाल देते हैं। लेकिन इन्हीं हादसों में जब प्रशासन की लापरवाही के कारण मासूमों की जान चली जाए, तो कहने के लिए कुछ नहीं बच जाता। बीते शुक्रवार को उत्तराखण्ड के टिहरी गढ़वाल जिले में ऐसा ही एक हादसा हुआ। जिसमें ऑल वेदर रोड का पुस्ता गिरने से दो मंजिला मकान ढह गया। इस हादसे में तीन भाई-बहनों की जान चली गई। ये हादसा शुक्रवार तड़के 4 बजे के करीब टिहरी गढ़वाल के हिंडोलाखाल के पास खेड़ा गाड इलाके में हुआ। ये इलाका ऋषिकेश-गंगोत्री एनएच 94 पर पड़ता है।

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मायके से लौटी मां तो पूरा घर उजड़ चुका था

घटना के वक्त बच्चों की मां देवा देवी अपने मायके गई हुई थी। घर पर उनके पति धर्म सिंह, उनका बेटा (18 वर्ष), बेटी (25 वर्ष) और एक रिश्तेदार की लड़की (23 वर्ष) थी। सुबह 4 बजे के करीब जब मकान के ऊपर एकदम से मलबा गिरा तो धर्म सिंह जैसे तैसे बाहर निकल गए। लेकिन तीनों भाई-बहन अपनी जान बचाने में असमर्थ रहे। एनएच के भारी पुस्ते के साथ मलबा गिरने से तीनों की मौत हो गई। इसके बाद देवा देवी पत्नी धर्म सिंह को भी मायके से बुलाया गया। मायके से रोते बिलखते लौटीं तो तबाही का मंजर देख मां बेहोश हो गई।

हादसे की सूचना मिलने के डेढ़ घंटे बाद घटनास्थल पर राहत व बचाव की टीम पहुंची। टीम ने पहुंचते ही मलबा हटाना शुरू किया। मकान के ऊपर मलबा इतना अधिक था कि 4 घंटे बाद पहला मृत शरीर पाया गया। इसके बाद अन्य दो बच्चों के मृत शरीर भी निकाले गए। जिसे देख पूरा गांव रो पड़ा।

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NH अधिकारियों पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

इस हादसे पर ग्रामीणों का कहना है कि एनएच द्वारा उस स्थान पर कच्चा पुस्ता रखा गया था। जिसके कारण भयानक हादसा हुआ। एक ग्रामीण ने कहा कि यदि एनएच द्वारा पक्का पुस्ता रखा जाता, तो हादसा टल सकता था। वहीं मौके पर जब एनएच के अधिकारी भी पहुंचे तो उन पर ग्रामीणों का गुस्सा फुट पड़ा। ग्रामीणों ने एनएच को जाम करने की कोशिश भी की, लेकिन मौके पर पहुंचे एसडीएम व अन्य अधिकारियों ने लोगों को शांत कर दिया। ग्रामीणों के गुस्से को देखते हुए एनएच के अधिकारियों ने नरेंद्रनगर थाने में शरण ली।