भारत में बनने जा रही कोरोना वायरस की वैक्सीन, जल्द शुरू होगा ट्रायल

कोरोना वायरस की वैक्सीन
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पूरी दुनियां में कोरोना का कहर एक भयानक रूप लेने लगा है। अमेरिका और इटली जैसे बेहतरीन चिकित्सा व्यवस्था वाले देश भी इस वायरस के सामने बेबस नजर आ रहे हैं। इटली में जहां COVID19 से संक्रमितों की संख्या 1 लाख 15 हजार से अधिक पहुंच चुकी है, तो वहीं अमेरिका में प्रतिदिन रिकॉर्ड नए मामले दर्ज होने के बाद यह आंकड़ा 2.5 लाख के करीब पहुंच गया है। भारत में भी अब कोरोना वायरस के मामलों में तेजी से इजाफा होने लगा है। जो कि अच्छे संकेत नहीं है। लेकिन अच्छी खबर ये है, कि इसे रोकने के लिए अब भारत में वैक्सीन बनाने की तैयारी होने लगी है।
कई बड़े देशों ने कोरोना वायरस का प्रकोप रोकने के लिए वैक्सीन बनाने की कोशिश की। लेकिन इसमें अभी तक कोई सफल नहीं हो पाया। वहीं अब भारत भी COVID19 की वैक्सीन बनाने की तैयारी में है।

नाक में डाली जाएगी वैक्सीन की बूंद

कोरोना की वैक्सीन हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक विकसित कर रहा है। इस वैक्सीन को तैयार करने के लिए भारत बायोटेक ने युनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन-मैडिसन और फ्लूजेन कंपनी के साथ समझौता किया है। इन तीनों के वैज्ञानिक मिलकर कोरोना के इलाज के वैक्सीन विकसित कर रहे हैं, जिसको शरीर में सिरिंज से नहीं डाला जाएगा बल्कि इस वैक्सीन की एक बूंद को पीड़ित इंसान की नाक में डाला जाएगा।

कोरोना वायरस की वैक्सीन

इस वैक्सीन का पूरा नाम ‘कोरोफ्लू: वन ड्रॉप कोविड -19 नेसल वैक्सीन’ है। कोरोफ्लू को फ्लू की दवाई एम2एसआर के बेस पर बनाया जा रहा है। इसे योशिहिरो कवाओका और ग्रैबिएल न्यूमैन ने मिलकर बनाया था। यह इनफ्लूएंजा बीमारी की प्रभावशाली दवा है।

कोरोना वायरस के इलाज के लिए बनने वाली कोरोफ्लू दवा में कोविड 19 का जीन सीक्वेंस मिला दिया गया है। इससे यह वैक्सीन जब पीड़ित इंसान के शरीर में डाली जाएगी तब उसके शरीर में कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी बन जाएंगे। जो कोरोना वायरस से लड़ने में आपकी मदद करेंगे।

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साल के अंत तक शुरू होगा क्लीनिकल ट्रायल

Corona virus vaccine

भारत बायोटेक की बिजनेस डेवलपमेंट हेड डॉक्टर रेसिंग रसेल फैसेस ऐलाने बताया कि ‘हम भारत में ही इस वैक्सीन को बनाएंगे, उसका क्लीनिकल ट्रायल करेंगे और फिर 300 मिलियन डोज बनाएंगे।’

इंसानों पर क्लिनिकल ट्रायल साल 2020 के अंत तक शुरू होगा। तब तक इसके परीक्षण यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन-मैडिसन की प्रयोगशाला में चलते रहेंगे।