बाबा साहब और हम

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Akshay sharma's blog

Blog by- Akshay Sharma

जब यह लेख खत्म होगा तो आखरी की पंक्तियों मॆ यह पढ सकेंगे की यह लेखक के निजी विचार है। संविधान के अनुच्छेद 19 में विचारों की स्वतंत्रता का अधिकार हो या फिर अनुच्छेद 51 में बुद्धि के लिए वैज्ञानिक चेतना जैसे नागरिक कर्त्वय।

यह सब भारतीय संविधान की देन है। इसे बाबा साहब की देन भी कहना अतिशोयक्ति नहीं होगा।

जब भी भारत  शिक्षा, न्याय और समानता जैसे शब्दो को खोजेगा निश्चित रुप से इतिहास में डाक्टर भीम राव अबेंडकर के इतिहास से गुजरना होगा। आज यानि 14 अपैल को डा अंबेडकर का जन्मदिन है। इतिहास में पहली बार विदेश से अर्थशास्त्र में पिएचडी करना, चाहे अंग्रेज सरकार में श्रम मंत्री होना हो। संविधान के मुख्या के रुप में जाने जाननी वाली बात हो या फिर दलितो के लिए जीवन लगा देने का साहस। बाबा साहब को कभी नहीं  भूलाया जा सकता।

बाबा साहब ने भारतीय समाज में मानव सभ्यता को राजनैतिक, आर्थिक और समाजिक नींव देने का कार्य किया है। बाबा साहब की ये दूरदर्शिता ही थी। जो भारत का लोकतंत्र 70 साल बाद भी सफल रुप से चल रहा है। नागरिको को उनके अधिकरो से अवगत कराना औऱ सभ्य आदर्श समाज का निर्माण करनें में डाक्टर भीम राव ने पूरा जीवन समर्पित कर दिया।

हम कहाँ तक अपने जीवन मे बाबा साहब के विचारों को सफल बना पाए। इसके उदाहरण भी देना अतिआवश्यक होना चाहिए।

शुरुआत अपने से की जाए तो बेहतर होगा

आज जब देश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कोरोना महामारी के चलते सामाजिक आपातकाल लगा चुके है। ऐसे में देश के सभी नागरिकों से भी एक-दूसरे की साहयता करना जरुरी हो गया है। कंपनियों को आदेश है कि किसी को नौकरी से न निकाले। परंतु हरियाणा राज्य के गुरुगाम में जहाँ मै कारयरत हूँ। अचानक बीस से अधिक करमचारियों को निकाला जा रहा था। ऐसे में बाबा साहब के विचारों को जिंदा रख कर मैं और मेरे साथी मिलकर अपने अधिकारों और कर्तव्यों का पालन करने के लिए आगे आए। जिस शिक्षित समाज की इस देश के पुरखे कल्पना करकर गए थे। वही हमने व्यहवारिक किया और हम तुरंत लेबर यानि मजदूर कानून के इंसपेक्टर तक पहुँचने में सफल रहे। व्यवस्था ने हमें साहयता दी। कंपनी के कर्मियों ने साहस से अपने अधिकारों का प्रयोग किया। ऐसे में कंपनी ने 36 धंटे के अंदर सभी कर्मियों को वापस रखने का फैसला लेना पड़ा। अधिकारों की जागरुकता और न्याय पर भरोसा जैसे शब्द बाबा साहब भीम राव अंबेडकर ने संविधान में कानून के जरिए जोड़े हुए हैं।

इस घटना के बाद हमें एक बार फिर यह अहसास हुआ कि जिस देश की नींव में स्वयं बाबा साहब जैसे महान व्यक्तित्व के विचार कानून के रुप में सम्मलित हो। उस भारत का सामजिक विज्ञान कैसे इतनी आसानी से हिलाया जा सकता है।

जय भीम

Disclaimer (अस्वीकरण)- इस आलेख में प्रस्तुत किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना, संपूर्णता, सटीकता और सत्यता के लिए talk2india उत्तरदायी नहीं है।